प्रकृति पर्व सरहुल की भव्य एवं विहंगम शोभायात्रा मंगलवार को मेन रोड में निकाली गयी. मेन रोड में जनसैलाब उमड़ पड़ा. राजधानी रांची के विभिन्न सरना समिति, अखरा, आदिवासी हॉस्टलों से करीब 500 के उपर शोभायात्रा निकाली गयी. कई समितियों के द्वारा आकर्षक झांकियां भी निकाली गयीं. मंगलवार को राजधानी की हर सड़कें शोभायात्रा से पटी थीं. सभी शोभायात्रा मेन रोड पहुंची जो आहिस्ता-आहिस्ता सिरम टोली सरना स्थल पर जाकर समाप्त हुई. सरहुल शोभायात्रा में ढ़ोल-मांदर की थाप पर हर कदम थिरकते नजर आयी. आदिवासी स्त्री, पुरूष, बहनें, बच्चे आकर्षक पांरपरिक परिधान के साथ जुलूस में शामिल हुए. सरहुल के अनुष्ठान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए। वह आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर, करमटोली, रांची में आयोजित सरहुल पूजा महोत्सव में शामिल हुए। इस पावन पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री ने यहां पारंपरिक विधि विधान से पूजा- अर्चना कर राज्य के विकास, सुख- समृद्धि एवं शांति की कामना की। परिसर में वृक्षारोपण कर (सखुआ का वृक्ष लगाकर) प्रकृति से जुड़े रहने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य वासियों को सरहुल महापर्व की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि झारखंड के बेहतर भविष्य के लिए आने वाले 25 वर्षों को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना है।
मेन रोड में विभिन्न समितियों ने निकाली शोभायात्रा
मेन रोड में हरमू, हरमू नवीन छात्रावास, मोरहाबादी सरना समिति, मोरहाबादी प्राक कला प्रशिक्षण केंद्र हॉस्टल, आदिवासी कॉलेज छात्रावास, पुरानी रांची सरना समिति, हिंदपीढ़ी सरना समिति, हेहल, हेसल सरना समिति, हातमा सरना समिति, सरहुल पूजा मधुकम, सरना समिति न्यू अभिमन्यू चौक, पहाड़ी क्षेत्र सरना समिति, रातू रोड सरना समिति, अरगोड़ा सरना समिति, डीबडीह सरना समिति, बांध गाड़ी सरना समिति, बड़गाईं सरना समिति, कोकर सरना समिति, लालपुर सरना समिति, कांटा टोली कोनका मौजा, वीर बुद्धु भगत आदिवासी कॉलेज छात्रवास, महिला कॉलेज छात्रवास समेत रांची के करीब 500 से अधिक समितियों के द्वारा आकर्षक एवं भव्य शोभायात्रा निकाली गयी.
आकर्षक झांकियां भी निकाली गयी
बांध गाड़ी, हरमू, लालपुर सरना समिति सहित कई अन्य समितियों के द्वारा सरहुल के मौके पर आकर्षक झांकियां निकाली गयीं. बांध गाड़ी के द्वारा शहरी विकास एवं पैसे के कारण प्रकृति विनाश एवं उसके सरंक्षण का संदेश देते हुए तथा लालपुर सरना समिति के द्वारा पेड़ों को बचाने के अभियान का संदेश देते हुए झांकियां निकाली गयी.
नृत्य एवं संगीत रहा आकर्षण का केंद्र
सरहुल शोभयात्रा में पांरपरिक परिधान, नृत्य संगीत की धूम रही. अधिकांश सरना समितियों के द्वारा महिला पुरूष पारंपरिक नृत्य संगीत के साथ शोभा यात्राा निकाली गयी. महिलाओं के द्वारा जोड़ाई नृत्य एवं पुरूषों के द्वारा ढ़ोल-मांदर बजाते हुए नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा. इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी.
विभिन्न समितियों ने लगाया स्वागत शिविर
मेन रोड में चडरी सरना समिति, झामुमो जिला कमेटी जेएलकेएम पार्टी, शास्त्री मार्केट, आदिवासी जनपरिषद, केंद्रीय सरना समिति सहित अन्य समितियों ने स्वागत शिविर लगाया. कई समितियों ने चना, गुड़ एवं ठंढा शर्बत का वितरण किया.
आदिवासियों को अपनी रूढीवादी परंपरा को हर हाल में बचाना होगा : चंपाई
चडरी सरना समिति के मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो, विधायक सीपी सिंह आदि शामिल हुए. इस मौके पर चंपाई सोरेन ने सभी को सरहुल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज चारों ओर से आदिवासी समाज पर हमला हो रहा है. इसलिए हमें अपनी आने वाले पीढ़ी को आदिवासी धर्म संस्कृति, खासकर रूढीवादी परंपरा के बारे में बताना होगा. रूढ़ीवादी परंपरा के बिना आदिवासी समाज समाप्त हो जायेगा।