झारखंड की शहरी क्षेत्रों की नदियां होंगी साफ, पहले चरण में छह शहरों का चयन



राज्य के शहरों से होकर बहने वाली नदियां साफ होंगी। नमामि गंगे परियोजना के तहत शहरी नदी प्रबंधन पर जोर शोर से कार्य चल रहा है और जल्द इसका असर झारखंड के कई शहरों से गुजरनेवाली नदियों पर दिखेगा।

प्रथम चरण में रांची, धनबाद, आदित्यपुर, चास, साहिबगंज और राजमहल में शहरी नदी प्रबंधन के तहत गंगा, दामोदर, खरकई, हरमू और स्वर्णरेखा नदी का प्रबंधन किया जाएगा। इस प्रबंधन के तहत इन नदियों के जल को साफ बनाकर अविरल धारा बहता रहे। यह सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही रीवर फ्रंट डेवलपमेंट, पार्क डेवलपमेंट,प्लांटेशन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर एक ईको फ्रेंडली वातावरण विकसित किया जाएगा। इसे लेकर बुधवार को रांची में एक राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि झारखंड में बहनेवाली नदियों के संरक्षण, जीर्णोद्धार, सौन्दर्यीकरण और प्रबंधन में राज्य सरकार पहले से हीं कई कार्यक्रम चला रही है।

आधारभूत संरचना में नदियों को प्राथमिकता सूची में रखा जाय

उन्‍होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि शहरी विकास के लिए विकसित हो रहे आधारभूत संरचना में नदियों को प्राथमिकता सूची में रखा जाय। इसके लिए नगर विकास और पथ निर्माण विभाग अपनी योजनाओं में ही आसपास की नदियों पर रीवर फ्रंट डेवलमेंट, एसटीपी निर्माण,प्लांटेशन और ईको फ्रेंडली वातावरण बनाने पर कार्य कर रहे हैं। प्रधान सचिव ने कहा कि हर शहर में अलग प्रकार की चुनौतियां हैं। इसलिए हर शहर के लिए स्पेसिफिक प्लान तैयार होना चाहिए।

छोटी नदियों को भी नमामि गंगे परियोजना में मिले जगह

सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार के नमामि गंगे योजना का लाभ उन राज्यों को ज्यादा मिलता है जहां गंगा का क्षेत्र ज्यादा है। झारखंड में क्योकि मात्र 80 किमी हीं गंगा क्षेत्र है। इसलिए हमारी अन्य सहायक नदियों को इस योजना से जोड़ा जाय। हालांकि ये सभी नदियां गंगा में हीं अपना जल छोड़ती हैं इसलिए इसका फायदा गंगा के जल को स्वच्छ और अविरल बनाए रखनें में मिलेगा।

निदेशक ने सभी स्टेकहोल्डर्स से मांगा सुझाव

इस मौके पर झारखंड में नमामि गंगे परियोजना के निदेशक सूरज कुमार ने कहा कि सभी नगर निकाय इसके लिए अधिक से अधिक जन भागीदारी को बढ़ाएं और प्रत्येक स्टेक होल्डर को साथ लेकर चलें। उन्होंने सभी नगर निकायों, जल संसाधन विभाग, पर्यटन विभाग, पेयजल और स्वच्छता विभाग, उद्योग विभाग और एनएमसीजी के पदाधिकारियों से भी राय मांगी। उन्होंने कहा कि हर शहर की चुनौतिया अलग अलग है इसलिए चुनौतियों को देखते हुए प्लानिंग करें।

शहरी नदी प्रबंधन के कार्यशाला की खास बातें

  • नदियों को प्रदूषणमुक्त बनानें के लिए कदम उठाना।
  • नागरिकों के लिए स्वस्थ व सुंदर वातावरण तैयार करना।
  • नदियों के प्राकृतिक परिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना।
  • नदी के किनारे हरा भरा क्षेत्र विकसित करना।
  • नदी के किनारे साइकिल ट्रैक और फूटपाथ विकसित करना।
  • नागरिक सहभागिता के तहत लोगों को नदी और जल स्रोत को संरक्षित करने के लिए प्रेरित करना।
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